ससुराल गेंदा फ़ूल-१

लेखिका : नेहा वर्मा
उसके आते ही मुझे कमला ने पास ही सब्जी मण्डी से सब्जी लाने भेज दिया। मैं जल्दी से बाहर निकली और थोड़ी दूर जाने के बाद मुझे अचानक याद आया कि कपड़े भी प्रेस कराने थे…मैं वापस लौट आई। कमला और साहिल दोनों ही मुझे नजर नहीं आये… साहिल भी कमरे में [...]

मेरी तो घंटी बज गई

प्रेषक : पुनीत
आंटी अपने दो बच्चे के साथ रहती हैं।
अंकल अरब-देश में नौकरी के सिलसिले में गए हुए हैं।
हम सब एक ही बिस्तर में सोए हुए थे।
आँटी बेड के एक ओर, मैं दूसरे किनारे पर और बीच में बच्चे सोए हुए थे।
अचनक नींद में आंटी के वक्ष पर मेरा हाथ लग गया।
मेरी तो घंटी बज [...]

अजनबी शहर में कामवाली

प्रेषक – हरामी लण्ड
मैं कई दिनों से इसी ताक में था कि कब मेरे दोस्त लोग फ्लैट पर ना हों और मैं उस कामवाली को चोद दूँ। उस दिन जब वो मेरे फ्लैट में आई तो मैं खुश हो गया। मैंने उसे किचन दिखा दिया, जब वो खाना बनाने की तैयारी कर रही थी, तो [...]

सर्दी में पार्टी

प्रेषिका : नितिका सिंह
उस दिन मैं एक पार्टी में थी मेरे अंकल के यहाँ। उस दिन वो मुझे बड़े अजीब से देख रहे थे, जनवरी का महीना था और मैं जींस शर्ट पहने थी, जो मम्मी ने मुझे पहली बार पहनने दिए थे और जैकेट था। मुझे कुछ ठण्ड सी लग रही थी, मुझे छींक [...]

समुन्दर का किनारा

लेखिका – नेहा वर्मा
सहयोगी – जो हंटर
शाम को जो ने सभी को जगाया और कॉफी पिलायी। समय देखा तो ५ बज रहे थे। हम सभी फ्रेश हो गये थे सो अब बीच पर दुबारा पहुँच गये। सभी ने स्वीमिंग सूट पहन लिए थे। मैं और लता कम कपडों में थी उसका फ़ायदा जो और विक्रम [...]

मेरी सांवली दीदी

प्रेषिका : निकिता सिंह
वेटर तो बोल कर चला गया, मैं समझ गया कि वेटर हमें पति पत्नी समझ रहा है। फ़िर मैं कमरे में आया तो दीदी पलंग पर लेटी हुई थी।
मैंने कहा- दीदी ! तुम बहुत थक गई हो ! थोड़ा फ़्रेश हो लो। फ़िर हम खाना खाएंगे।
दीदी बोली- तुम ठीक ही कहते हो [...]

शबनम और उसकी बेटियाँ-२

प्रेषक – अर्जुन सिंह
….पानी का गिलास उसके हाथ से छूटकर नीचे गिर गया। उसने सॉरी बोला और दूसरा गिलास लेने चली गई, दूसरा गिलास लेकर उसने मुझे दिया और फर्श पर गिरा पानी साफ करने लगी। जब वह नीचे झुकी तो उसके कुर्ते में से उसके बड़े-बड़े मम्मे दिखने लगे, उसको शायद महसूस हो गया [...]

मेरा पहला सेक्स

प्रेषक : बाबा
उन्हें चोदने को हुआ। बहुत बार मैं उनके पास जाता था, छेड़ता था पर वो मुझसे दूर हो जाती थी ! मेरी आंटी बहुत बदमाश भी थी। मेरे और उनके परिवार में बनती नहीं थी।
…आंटी का गांव के एक आदमी से चक्कर चल रहा था इसीलिए मैं उन पर ट्राई मारना चाह रहा [...]

पहली प्यास अपने ही घर में

प्रेषक : सुनील
हम दोनों काफ़ी घुले मिले हुए थे। इसी लिए हम एक दूसरे की सभी बातें जानते थे। मैं उसके स्तनों और चूतड़ों को देख कर अपने लण्ड से खूब पानी निकालता था और उसके करीब जाने की कोशिश करता था, बार बार उसके बूब्स से टकराता था । वो भी यह बात समझ [...]

तीसरी मंजिल

लेखिका – दिव्या डिकोस्टा
ऐसी ही एक रात थी… मैं छत पर टहल रही थी। रवि अपने दोस्त के साथ था। मेरे बारे में उन्हें नहीं पता था कि मैं रात को अक्सर छत पर टहलती हूँ। मैंने यूँ ही एक बार खिड़की से उसके कमरे में झाँका। रवि और उसका दोस्त कमल नीचे बैठे दारू [...]