प्रेषक – अर्जुन सिंह

….पानी का गिलास उसके हाथ से छूटकर नीचे गिर गया। उसने सॉरी बोला और दूसरा गिलास लेने चली गई, दूसरा गिलास लेकर उसने मुझे दिया और फर्श पर गिरा पानी साफ करने लगी। जब वह नीचे झुकी तो उसके कुर्ते में से उसके बड़े-बड़े मम्मे दिखने लगे, उसको शायद महसूस हो गया कि मेरी निगाहें उसके बूब्स पर हैं, फिर भी वो लापरवाही से पानी साफ करती रही, इससे मेरी हिम्मत कुछ बढ़ गई। एक तो अकेलापन और गर्मी की आलस भरी दुपहरी, इससे शायद उसमें भी सेक्स के प्रति कुछ भाव पैदा होने लगा था।

मैंने उससे पूछा कि तुम क्या कर रही थी, तो उसने बताया कि वह अभी कपड़े धोकर आई है, अभी उसको नहाना है। मैंने उसे बताया कि मुझे अभी २-३ घण्टे कोई काम नहीं है, इसलिए मैं यहीं बैठता हूँ, तुम नहा लो। ऐसा कहकर मैं पलंग पर बैठ गया और वो नहाने चली गई, बाथरूम उसी कमरे से अटैच्ड था।

थोड़ी देर में बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आने लगी, मैं समझ गया कि वो नहा रही है। मैंने धीरे से बाथरूम की किवाड़ में एक छेद से देखा तो वो क्या गज़ब लग रही थी! एकदम नंगी चिकना और गोरा बदन, कभी अपने बूब्स मसलती और कभी चूत पर पानी की धार गिराती। मेरा तो लण्ड तनकर खड़ा हो गया और मैं उसकी चूत में ….

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