एक व्यक्ति जिसका शल्य-चिकित्सा के ज़रिये लिंग-परिवर्तन किया गया था, उसे स्त्री बनाया गया था – उसने पाँच वर्षों क उपरान्त पुनः पुरूषों जैसे कपड़े पहनने शुरु कर दिए। उसके अनुसार यह परिवर्तन “अपर्याप्त” थे – और उसने मोनाश मेडिकल सेन्टर के उस चिकित्सक पर मुक़दमा दायर किया है जिन्होंने उसकी शल्य-चिकित्सा की थी।
मुकदमे के एक बयान में उच्चतम न्यायालय को इस 66 वर्षीय व्यक्ति ने बताया कि डॉक्टर ट्रुडी केनेडी और डॉक्टर क्रिस ग्राण्ट ने उसे सलाह दी थी कि चूँकि वह उभयलिंगता से ग्रसित है तो वह चिकित्सा के जरिये किसी एक लिंग का चुनाव कर सकता है। यह घटना 1993 से लेकर 1995 में हुई थी। उसने आगे बताया कि डॉक्टरों ने उससे कहा कि ऑपरेशन करके उसका लिंग, अंडकोष, उनसे सम्बन्धित ग्रंथियाँ, और हार्मोन निकाल दिए जाएँगे, यही उसका उचित ईलाज होगा। व्यक्ति का दावा है कि डॉक्टर ने उसके उभयलिंगी होने की जाँच ठीक तरीके से नहीं की थी। उसके अनुसार वह उभयलिंगी होने की शर्तों को पूरा नहीं करता था, पर उसने माना कि हालाँकि वह बचपन से ही ग़ौर तक रहा था कि उसके लिंग की बनावट भिन्न और अजीब है, और वह स्त्रियों जैसा व्यवहार भी करता है।
उसने कहा कि डॉक्टर उसके इतिहास की जाँच में विफल रहे थे, जिसमें यह शामिल था कि उसे उसकी अपनी माँ द्वारा ही 8 से 15 वर्ष की आयु में यौन-शोषित किया गया था। व्यक्ति ने कहा कि डॉक्टर कैनेडी ने दूसरे डॉक्टर से मेरे केस की फाईल का अध्ययन नहीं किया, क्योंकि वह डॉक्टर मर गए थे। पर इसने मेरा जीवन तो नर्क़ बना दिया। उसने कहा कि एक मनोचिकित्सक, डॉक्टर पैट्रिसिया मियाख, जिसने उसकी मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट बनाई थी, भी उसके इतिहास का पता करने में विफल रहीं थीं। व्यक्ति साउथर्न हेल्थ और प्लास्टिक सर्जन डॉक्टर ग्राहम ईसाक्स पर भी मुक़दमा दायर कर रहा है, जिन्होंने उसका लिंग, अंडकोष हटाए थे और योनि-द्वार बनाया था। वह अपनी क्षति के लिए मुक़दमा कर रहा है। इसमें भारी रूप से मेडिकल व्यय भी शामिल है। उसने यह शिकायत पहली बार 2004 में दर्ज़ की थी और 2007 में उसने वकील के साथ उच्चतम न्यायालय में शिकायत दर्ज की।
रक्षा-पक्ष के दस्तावेजों के अनुसार डॉक्टर कैनेडी का कहना है कि उनके अनुसार वह व्यक्ति एक पूर्ण उभयलिंगी था और यह लिंग-परिवर्तन के लिए की गई शल्य-चिकित्सा बिल्कुल उपयुक्त थी। उसने यह बात स्वयं ही स्वीकार की थी व हमारे सलाह के उपरांत वह उसके लिए तैयार भी हो गया था। डॉक्टर मियाख ने कहा, कि मैं इस व्यक्ति से 15 वर्ष पूर्व मिली थी और अब तो मेरे पास उसकी कोई फाईल भी नहीं है क्योंकि इतनी लम्बी अवधि के बाद उसे नष्ट कर दिया गया है। डॉक्टर ईसाक्स ने कहा कि एक प्लास्टिक सर्जन की हैसियत से उन्होंने किसी मनोवैज्ञानिक तौर पर पीड़ित का ईलाज़ नहं किया था। केस की अग्रिम सुनवाई अगले सप्ताह होगी, फिर इसे उच्चतम न्यायालय के पास भेजा जाएगा।
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