एक पति, अपनी को कह-कहकर थक गया कि वह कैसी दिखती है, उसने उसके लिए एक आदमकद शीशा ख़रीद दिया। इससे उसे थोड़ी सी मदद मिली, क्योंकि अब वह शीशे के सामने खड़ी होकर ख़ुद को देखती हुई पूछती कि वह कैसी दिखती है।

एक दिन, नहाने के बाद पत्नी फिर से शीशे के पास खड़ी होती है, वह अपनी चूचियों की शिकायत करती है कि वे बहुत छोटी हैं। पति एक सलाह देता है। “अगर तुम इन्हें बड़ी करना चाहती हो, तो रोज़ तुम एक टॉयलेट पेपर का टुकड़ा लो और अपनी चूचियों के बीच कुछ सेकेण्ड के लिए रगड़ो।”

वह कुछ भी करने के लिए तैयार थी, सो पत्नी ने टॉयलेट पेपर का टुकड़ा उठाया और शीशे के सामने खड़ी होकर रगड़ते हुए पूछा “इसमें कितना समय लगेगा?”

“कई साल लगेंगे पर बड़े हो जाएँगे,” पति ने उत्तर दिया।

पत्नी रुक गई। “तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि टॉयलेट पेपर बीच में रगड़ने से चूचियों के आकार बड़े हो जाएँगे, और इसमें सालों लगेंगे?”

पति ने उत्तर दिया। “क्यों नहीं, तुम्हारे गाँड पर तो असर हुआ, हुआ ना?”