लेखक : समीर
बातें करते करते मैने अपना हाथ सोनू की जाँघ पर रख दिया। उसने कोई विरोध नहीं किया, अब मैंने अपने हाथों से उसका चेहरा उठाया और उसके गालों पर चूम लिया। उसने अपनी आँखे बन्द कर लीं। अब मैंने उसके होंठों पर चूमा।
उफ़ऽऽ !!
क्या गुलाब की पंखुड़ी जैसे मलाईदार होंठ थे। मैंने उसके होंठो को चूसना शुरु किया और धीरे धीरे अपने हाथ उसके शरीर पर चलाने लगा। उसकी साँसें तेज होने लगी। मैंने उसके उरोजों पर हाथ रखा और उनको दबाने लगा उसके मुँह से सी…। सी…॥ की अवाजें निकलने लगी।
वो पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी। मैंने उसके कपड़े उतारने शुरु किये, पहले साड़ी, फिर ब्लाउज और फिर पेटिकोट अब वो सिर्फ़ लाल रंग की ब्रा और पैन्टी में थी। उसको इस तरह से देख कर मेरी आँखें फटी की फटी रह गई। उफ़ ! क्या गजब का बदन था उसका ! दूध की तरह सफ़ेद बदन और उसके ऊपर लाल रंग की ब्रा और पैन्टी ! सोनू बिल्कुल अप्सरा की तरह लग रही थी।
मेरा लंड एकदम खड़ा हो चुका था और पैन्ट फाड कर बाहर आने को बेताब था। मैंने अपना अन्डरवियर छोड़ कर सारे कपड़े उतार दिये और सोनू ऊपर आकर उसको बेतहाशा चूमने लगा। अब मैंने उसकी ब्रा को उतार दिया और उसके दोनों कबूतरों को आज़ाद …
पूरी कहानी यहाँ है !
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