प्रेषक : साकेत गुप्ता

हम सब लोग सही समय पर पहुच गए थे। भव्या आज कुछ ज्यादा ही सुन्दर लग रही थी। उसके कसे हुए बूब्स वाकई में बहुत अच्छे लग रहे थे। मैं तो बार बार उन्हीं को देख रहा था। शायद वो समझ गयी थी कि मैं उसके बूब देख रहा हूँ।

खैर हम लोगों की पार्टी रात १० बजे तक चली। खूब मज़ा किया हम सबने !

गाड़ी सिर्फ मेरे पास ही थी इसलिए सबको घर छोड़ने मुझे ही जाना था। आखिर में सिर्फ मैं और भव्या ही रह गए थे।

मैंने गाड़ी उसके घर की तरफ मोड़ दी।

जैसे ही मैंने उसको उसके घर पर उतारा तो वो बोली-अन्दर आ जाओ !

मैंने मना तो बहुत किया पर वो मुझे अन्दर ले ही गई। शायद उसका मन भी चुदने का था।

फ़िर धीरे से उसने मुझे अपने पास बिठाया और मुझसे बातें करने लगी।

सच में, मादरचोद, उसकी चूचियाँ देखकर तो मेरे मुँह में पानी आ गया। उसने मुझे देख लिया और बोली- स्वप्निल ! तुम मुझे पसंद करते हो ना?

मैंने भी हाँ कह दिया।…

पूरी कहानी यहाँ है !