हार्टी कहते हैं:

तेज़ व जल्द अथवा धीमा व स्थायी?
मैं यह जानना चाहूँगा कि दोनों में से कौन सा तरीका किसी स्त्री को अधिक सन्तुष्टि दे सकेगा – जोर व तेज़ी से चुदाई करना और जल्दी ही थक जाना अथवा धीरे-धीरे, ताल में, लम्बी अवधि तक चुदाई करना। कृपया उत्तर दें।

अँजली आँटी कहतीं हैं:

हाय हार्टी। उत्तम प्रश्न। तेज़ व जल्द अथवा धीमा व स्थायी। दोनों ही अपने आप में आश्चर्यजनक व मज़ेदार हैं। एक तरफ तो आप जब काफी गरम होते हैं, और आपके अन्दर का जानवर जागता है तो आप जितनी तेज़ी और ज़ोर से हो सके चोदना चाहते हैं। वहीं दूसरी ओर, यह धीमा और स्थायी होता है जहाँ आप वास्तव में अपने प्रेमिका की गहराईयों में जाकर असीम आनन्द लेते हैं, और आपको लगता है कि ये पल कभी न गुज़रें। दोनों के अपने मज़े हैं जिससे यह तय करना और भी कठिन हो जाता है कि कौन सा तरीका अपनाया जाय।

क्योंकि दोनों के अलग मज़े हैं तो किसी एक को बेहतर मान कर चुनाव करने की आवश्यकता ही नहीं है। सर्वोत्तम तरीका है कि दोनों ही विधियाँ अपनाई जाएँ। आराम से, और धीरे से शुरूआत करें और फिर धीरे-धीरे लय मे आ जाएँ। इससे आप दोनों को अनुभव भी मिलेगा। जब क्रियाएँ उत्तेजना से भरती जाएँ तो आप गति बढ़ाते हुए उत्तरोत्तर तीव्रता पकड़ सकते हैं। जब आपको लगे कि आप जल्दी ही स्खलित हो सकते हैं, तो आप विराम दें और फिर से धीरे-धीरे करने लगें। इससे आप स्खलन पर अपना नियंत्रण पा सकते हैं और फिर थोड़ी देर के बाद तेज़ी से करक सकते हैं। इस प्रक्रिया की आप जितनी बार चाहें पुनरावृति कर सकते हैं, और इससे आप दोनों को बेहतरीन चरम की प्राप्ति होगी।

इसे मिला-जुला कर करें और प्रयोग करते रहें।

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