एक दिन एक व्यक्ति मर गया और नरक में गया। वह दुःखी होकर इधर-उधर जा रहा था तभी उसकी एक शैतान से मुलाक़ात हुई…

शैतानः इतने उदास क्यों हो?

व्यक्तिः क्यों न रहूँ? मैं नरक में हूँ!

शैतानः नरक इतना बुरा भी नहीं है। यहाँ पर भी मज़े हैं। क्या तुम पीते हो?

व्यक्तिः ज़रूर, मुझे पीना बहुत पसन्द है।

शैतानः तो फिर तुम्हें सोमवार का दिन अच्छा लगेगा। सोमवार को हमलोग हर प्रकार के ड्रिंक पीते हैं। व्हिस्की, टेकीला, बीयर, सॉफ्ट ड्रिंक्स, जो भी तुम चाहो! हम आख़िरी हद तक पीते हैं, उल्टी करने तक पीते हैं। उल्टी होने के बाद फिर से पीते हैं। और तुम्हें नशे की चिन्ता भी नहीं करनी है, क्योंकि तुम तो पहले से ही मर चुके हो।

व्यक्तिः अहा! ये तो मज़ेदार रहेगा!

शैतानः क्या तुम धूम्रपान करते हो?

व्यक्तिः हाँ, मज़े से!

शैतानः अच्छा! तो तुम्हें मंगलवार पसन्द आएगा। हम दुनिया की सबसे अच्छी सिगार पीते हैं और अपने फेफड़े को धुँए से भर लेते हैं। अगर तुम्हें कैंसर होने का डर है, तो डरो मत, तुम वैसे ही मरे हुए हो, याद है?

व्यक्तिः वाऊ, काफ़ी मज़ेदार है!

शैतानः मैं शर्त लगाकर कह सकता हूँ कि तुम जुआ भी खेलते हो।

व्यक्तिः सही बात है, मैं खेलता हूँ।

शैतानः क्योंकि बुधवार को तुम मनपसन्द रुप से जुआ खेल सकते हो। क्रैप्स, ब्लैकजैक, रोलेट, पोकर, स्लॉट्स, और काईनो। अगर तुम दीवालिया हो जाते हो, कोई समस्या नहीं, तुम तो वैसे ही मर ही चुके हो, याद है ना?

व्यक्तिः तुम मज़ाक कर रहे हो? अब यह मत कहना कि तुमलोग ड्रग्स भी….

शैतानः सही कहा! गुरुवार को ड्रग्स का दिन होता है। उस दिन तुम कटोरा भर कर ड्रग्स ले सकते हो। जहाज़ के आकर इतना ड्रग्स का धुँआ पी सकते हो। तुम जितना चाहो, उतना ड्रग्स तुम्हें मिलेगा, क्योंकि तुम तो वैसे ही मरे हुए हो, तो कौन देखता है?!?!?!

व्यक्तिः वाऊ! मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि नरक इतनी मस्त जगह है!

शैतानः तुम समलैंगिक हो?

व्यक्तिः नहीं…

शैतानः ओहह्ह्हहहह… फिर तुम शुक्रवार से नफ़रत करोगे।