गुरूजी:
हो सकता है कि यह थोड़ा अजीब सी विशेषता हो; पर उम्र के हिसाब से पहले सेक्स करने में लंकाई किशोर फ्रेंचों से कहीं आगे हैं। जहाँ एक फ्रेंच किशोर के पहले सेक्स की औसत आयु 17.5 (लड़का), और 17.2 (लड़की) होती है, वहीं श्रीलंकाई लड़कों की यही औसत आयु 15.3, और लड़कियों की 14.4 होती है।

लंकाई समाज किसी भी माणदण्डों के हिसाब से लज्जाशील नहीं कहा जा सकता। यह सच है कि, तुलना करने पर आपको पूरे देश में एक सा हिसाब नहीं मिलेगा। वहाँ लिंगभेद को मिटाकर भी वहाँ के लोगों में जीने दो की भावना सभी लोगों में जीवित है।

कन्या-भ्रूण-हत्या की बातें देश या राजधानी कोलम्बो में सुनने को नहीं मिलती, यहाँ की एक स्त्री सुरक्षित रूप से देर रात पार्टी से कार चलाते हुए घर आ सकती है।

परन्तु स्वास्थ्य-मंत्रालय के सर्वेक्षण ने प्रारम्भिक तथ्यों से सबको चौंकाया। सर्वेक्षण में पाया गया कि 15 वर्ष से अधिक की स्कूली लड़कियों में 72 प्रतिशत यौन-क्रियाओं में पहले शामिल हो चुकीं थीं। जिनमें से 43 प्रतिशत द्विलिंगी, 43 प्रतिशत समलैंगिक, और 29 प्रतिशत अश्लील फिल्म देखने में शामिल थीं।

यौन औषधि विशेषज्ञ डॉ. कपिला राणासिंघे ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय को एक निशान के तौर पर लेना चाहिए न कि अन्तिम शब्दों के रूप में, जैसा कि श्रीलंकाई माहौल में होना चाहिए। इससे यह पता चलता है कि इस मामले में आगे अभी और भी अनवेषण की आवश्यकता है। इससे इस बात को भी बल मिलता है कि किशोरों में यौन-ज्ञान का प्रचार-प्रसार होना चाहिए। अगर उन्हें ख़तरों का पता रहेगा तो वे सावधानी बरत कर अपनी रक्षा का उपाय कर सकेंगे।

राणासिंघे ने आगे बताया कि यौन-शिक्षा यहाँ के स्थानीय पठन-कार्यक्रमों में शामिल किया गया है पर यह एक सीमा तक है और इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से बतया जाता है।

“विकसित देश जैसे फ्रांस में प्रथम बार सेक्स करने की औसत आयु पुरूषों में 17.5 और स्त्रियों में 17.2 है। ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्हें उचित यौन-शिक्षा दी गई है, जो किशोरों को यह बताता है कि कौन सी सावधानी बरतनी चाहिए, और उनमें जिज्ञासा के स्तर को कम कर दिया जाता है,” उन्होंने बॉटम लाइन समाचारपत्र को बताया।

परन्तु उन्होंने यह भी कहा कि दक्षिण-एशियाई समुदायों की अपेक्षा श्रीलंका में सेक्स का चलन अधिक खुला है। “हमारे स्वास्थ्य-सम्बन्धी आँकड़े हमें इन देशों से कहीं बेहतर दर्शाते हैं। यह भी एक कारण है कि एच आई वी इतनी तेज़ी से नहीं फैला है; हम अपने क्षेत्र में सबसे कम एच आई वी दर्शाने वाले देश हैं,” उन्होंने कहा।

भारत के बारे में कहा कि, वहाँ भी यौन-शिक्षा जैसी समान समस्या विद्यमान है। “श्रीलंका में, यहाँ लिंगानुपात बेहतर और जाति के मामले में भी समाज अधिक एकजुट है। भारत में, उपेक्षा और शिक्षा के अभाव कई स्तरों पर है,” उन्होंने कहा।