सेना का जवान जबतक उस छोटे से शहर में पहुँचा, तबतक वहाँ के सारे होटलों के कमरे बुक हो चुके थे।
“यहाँ कोई कमरा मिल सकेगा,” उसने गुहार लगाई। “या सिर्फ एक बेड, कहीं पर भी मिल जाये, कोई फर्क नहीं पड़ता।”
“ऐसा है, कि हमारे पास एक डबल बेडरूम है जिसमें एक ही व्यक्ति ठहरा हुआ है – वह एयरफोर्स से है,” मैनेजर ने स्वीकार किया, “और हो सकता है कि किराये का बँटवारा करना उसे ठीक लगे। पर मैं सच्चाई बता देना चाहता हूँ, कि वह इतनी जोर से खर्राटे भरता है कि आस-पास के कमरों से भी लोग शिकायतें कर रहे हैं। पता नहीं आपके लिए ठीक रहेगा या नहीं।”
“कोई दिक्कत नहीं होगी,” थके हुए जवान ने उसे भरोसा दिलाया। “मैं चला लूँगा।”
अगली सुबह वह जवान नाश्ते के लिए नीचे आया – उसकी चमकती आँखों से ताज़ापन झलक रहा था। “अच्छी तरह सोये ना?” मैनेजर ने पूछा।
“एकदम मज़े से।” मैनेजर प्रभावित हो गया। “उसकी खर्राटों की आवाज़ से कोई दिक्कत नहीं हुई?”
“नहीं, मैंने उसे चुटकियों में ठीक कर दिया,” जवान ने कहा।
“आपने कैसे किया?” मैनेजर ने पूछा।
“मैं जब गया तो वह सो रहा था, खर्राटे भर-भर कर,” जवान ने बताया। “मैं वहाँ पहुँचा, उसके गाल पर एक चुम्मी ली, और कहा, ‘गुड नाईट, ब्यूटीफुल,’ उसके बाद वह जाग उठा और रात भर मेरी पहरेदारी करता रहा।”
0 Comments until now