एक मोटरसाईकिल सवार पुलिसवाले ने रूकने के इशारे की अवहेलना करने के बाद एक लैम्बोर्गिनी डायब्लो वाले को रोक कर पूछा। “क्या मैं आपका ड्राईविंग लाईसेन्स और पंजीयन देख सकता हूँ।”

“क्या बात है, ऑफिसर?”

“तुमने अभी रूकने के चिन्ह को क्रॉस कर लिया।”

“अरे, यार, वहाँ मीलों तक कोई और गाङी नहीं थी भाई।”

“जो भी हो सर, वहाँ आपको पूरी तरह से रूकने की ज़रूरत है, दोनों ओर देख लें फिर सावधानी से आगे बढ़ें।”

“तुम मज़ाक कर रे हो!”

“यह कोई मज़ाक नहीं है, सर।”

“देखो, मैंने लगभग रूकने के बराबर गाङी को धीमा कर लिया था, मुझे बीसियों मीलो तक कोई न दिखा, फिर मैं सावधानी से आगे बढ़ा।”

“यह बात थोङी हटकर है, सर। आपको पूरी तरह से रूकना चाहिए, और आपने ऐसा नहीं किया। अब अगर मैं आपका लाईसेंस देख सकूँ…”

“तुम्हारे पास काफी समय है, दोस्त। बात क्या है, सारी दुकानें बन्द हैं क्या?”

“सर, मैंने आपकी पिछली टिप्पणी को नज़रअंदाज़ कर दिया। मुझे अपना लाईसेंस और पंजीयन तुरन्त दिखाएँ।”

“मैं दिखाऊँगा, अगर तुम मुझे बहुत धीमा करने, और पूरी तरह रूकने के बीच में अन्तर बता दोगे।”

पुलिस वाले के लिए यह काफी ज़्यादा हो रहा था। “सर, मैं इससे बेहतर कर सकता हूँ।” उसने कार का दरवाज़ा खोला, उस दुष्ट गाङीवाले को बाहर खींचा, और अपनी छङी से उसके सर पर मारना शुरू किया। “अब सर, आप क्या कहते हैं, मैं धीमा करूँ या पूरी तरह से रूक जाऊँ?”