प्रेषक : विक्रम मलहोत्रा
उसी वक्त शिप्रा सामने वाले सोफे से उठकर मेरे बगल में सटकर बैठ गयी और मेरे हाथों से कॉफी का मॅग ले कर टेबल पर रख दिया. और मेरी आखों की तरफ देखने लगी…….और कहाँ अब देखों जो देखना है….. मेरी समझ में नहीं आ रहा था की मैं क्या करूँ. तभी उसने अपने होंठो को मेरे होंठो पर रख दिए और कहाँ शायद अब तुमको देखने में आसानी होगी. और ज़ोर से मेरे होंठों को चूसने लगी थोरी देर में मैं गरमा गया और मेरे हाथ उसकी चूचियों को दबाने लगे. और अब मैं भी उसके होंठों को चूस रहा था. ये मेरी लाइफ का सबसे बड़ा और हॉट दिन था. आज से पहले मैने कभी ऐसा महसूस नही किया था. धीरे-२ हम दोनों की साँसे गरम हो रही थी और मेरे हाथों का दबाव उसकी चूचियों पे बढता ही जा रहा था और वो ज़ोर ज़ोर से साँसे ले रही थी. तभी वो मेरे बगल से उठ कर मेरे ऊपर दोनो घुटनों को मोड़ कर अपने हिप्स को मेरे ऊपर रख कर मेरी तरफ अपना सीना दिखाते हुए बैठ गयी. मेरे ऊपर चढ़ कर मेरे होंठों कों बदस्तूर दबाये जा रही थी. मैने भी उसे अपनी बाहों मे कस कर भर लिया और उसेके रसीलें होंठों को चूसने लगा जिस अंदाज़ से वो मेरे ऊपर बैठी थी उससे उसेके हिप्पस का प्रेसर मेरे लंड पर पड़ रहा था. जिसकी वजह से मेरा लंड टाइट होने लगा और उसके हिप्स को छूने लगा.
शिप्रा ने पूछा विक्की ये मेरे नीचे कड़ा कड़ा क्या लग रहा हैं मैने कहाँ शिप्रा ये मेरा लंड हैं. क्या मै इसे देख सकती हूँ, मैने कहा- डार्लिंग ये सिर्फ़ तुम्हारे लिए ही है. और वो सोफे से उत्तर कर नीचे ज़मीन पर घुटने के बल बैठ गयी और अपने हाथों से मेरी पैंट के ऊपर से ही लंड पकड़ लिया और वो मेरी तरफ़ देखते हुए मेरा लंड मसलने लगी और मैने बड़कर उसके होंठों को चूम लिया और हाथों से मैं अब उसकी टी-शर्ट उतारने लगा तो उसने अपने दोनो हाथों को ऊपर कर दिया और मैने उसकी टी-शर्ट उतार दी. वो अंदर ब्रा में अपने मिनी फूटबाल जितनी चूचियां छुपा रखी थी. वो बिना परवाह किए मेरे लंड को पैंट के ऊपर से मल रही थी. मैने ब्रा के ऊपर से उन हिमालय जितनी विशाल चोटिया ……………..
पूरी कहानी यहां है
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