प्रेषक : अमित
तो मैं रात को भाभी के पास ही सो जाता था, शायद भाभी को भी कोई परेशानी नहीं थी क्योंकि मेरी उमर कम ही थी। भाभी और मैं काफ़ी घुलमिल गए थे। वो मेरे सामने ब्लाउज़ पेटिकोट में ही आ जाती थी और मेरे सामने ही साड़ी पहन लेती थी। इस हालत में भाभी को देख कर मेरे लण्ड में बहुत उत्तेजना होती थी और मैं चाहता था कि किसी तरह से उनकी चूची दबाउं और चूत देखूं। मैं अपनी उत्तेजना हस्तमैथुन करके ही शान्त करता था। बस इसी तरह मेरी एक महीने की छुट्टियां समाप्त हो गई और मैं अपने घर आ गया।

इस प्रकार चार साल चलता रहा लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हो पाई कि मैं कुछ कर सकूं। इस बीच उनके कोई बच्चा भी नहीं हुआ। अबकी बार जब मैं उनके घर गया तो मैंने भाभी से पूछा कि शादी को काफ़ी दिन हो गए हैं, खुशखबरी कब सुनाओगी?

तो उन्होंने कहा कि अभी मैंने ही आपके भैया से मना कर दिया है। कुछ दिनों बाद बच्चे के बारे में सोचेंगे। उस रात मैं उनके साथ ही बेड पर सो गया। भाभी भी ब्लाउज़ पेटिकोट में ही मेरे पास लेट गई और सो गई। मैंने थोड़ी हिम्मत की और अपना हाथ उनकी चूची पर रख दिया। भाभी की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई तो मैंने धीरे धीरे चूची को दबाना …………………
…………….चूमना शुरू किया तो वो तड़फ़ने लगी। शायद वो काफ़ी दिनों बाद यह सब कर रही थी। मैंने भाभी के पैरों को फ़ैला दिया और बीच में आकर मैंने उनकी चूत पर अपना लण्ड लगा दिया। भाभी ने अपने चूतड़ उठा कर मेरा लण्ड अपनी चूत में ले लिया। उनकी चूत से पानी सा आ रहा था जिससे मेरे लण्ड को उनकी चूत में जाने में कोई परेशानी नहीं हुई और मैं उनकी चूत में जोर जोर से………………
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