प्रेषिका : प्रिया-प्रीति
भाभी बोली- तभी तो कहती हूं, शादी कर लो, कब तक अकेले रहोगे तो मैं हंस दिया।

फ़िर भाभी मेरी होबीज़ के बारे में पूछने लगी। मैंने एकदम से उनके और हस्बैंड के सम्बंधों के बारे में पूछा तो वो बोली क्यों मूड खराब करते हो।

मैंने कहा कि बस पूछ ही रहा हूं। फ़िर वो उठने लगी तो मैं भी उठ गया और कहा कि भाभी आपको भी नींद आ रही है और मैं भी सोने जाता हूं।

फ़िर मैं अपने घर आ गया और सारी रात मुझे नींद नहीं आई। अगले दिन दरवाजा खटखटाने की आवाज से मैं उठा और दरवाजा खोला तो देखा कि भाभी खड़ी थी।

वो बोली- कैसे घोड़े बेच कर सो रहे हो और वो अन्दर आ गई।

मैंने पूछा कि भैया कहां हैं तो उन्होंने कहा कि ओफ़िस गए हैं, तुम घर आ जाओ, मैंने आलू के परांठे बनाए हैं।

मैं फ़्रेश होकर गया तो भाभी टेबल पर नाश्ता लगा रही थी। उन्होंने काली टी और कैप्री पहनी थी जिसमें उनके हिप्स साफ़ दिख रहे थे।मैंने अपना ध्यान वहां से हटाया और पूछा कि भाभी आज मुझ पर आप इतनी मेहरबान कैसे?

तो वो बोली- बस ! ऐसे ही।

फ़िर मैं नाश्ता करने लगा। खाते खाते मुझे धस्का सा लगा तो वो भाग कर मेरे पास आई और मेरी पीठ मसलने लगी और मुझे पानी पिलाया। उनका हाथ मेरी कमर पर नाच रहा था। मैंने कहा- अब ठीक है।

वो बोली- तुम खाओ, मैं तुम्हारे पास ही बैठ जाती हूं। उनका हाथ अभी भी मेरी पीठ पर था। खाते खाते मैंने जान बूझ कर अपना हाथ उनके बूब्स पर लगा दिया तो उन्होंने मेरी इस हरकत…………….
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