आप सब को मेरा हैलो, मैं विकी, आलमबाग़, लख़नऊ – भारत से हूँ। मैं 27 वर्षीय हूँ, 5 फुट 11 इंच लम्बाई लिए, एक अच्छे शरीर का मालिक हूँ। और सहवास करने के लिए लालायित स्त्रियों को संतुष्ट करने के लिए मेरे पास 6 इंच लम्बा फौलादी लंड है। मैंने कभी भी यह नहीं सोचा था कि मेरे शहर में बहुत सारी असंतुष्ट महिलायें व लङकियाँ हैं। एक दिन मैं एक अप्वायंटमेट पर एक क्लायंट के घर गया, चूँकि मैं एक बहु-राष्ट्रीय बैंक में कार्यरत हूँ, तो यह एक व्यावसायिक बुलावा था। यह कहानी एक 29 वर्षीय विवाहिता की है जिसके साथ मैं कई घंटे उसके शरीर का मज़ा लेते हुए बिता चुका हूँ। उसका नाम निशा है। वह एक घरेलू कामकाजी महिला है। उसका पति ना तो नामर्द है ना ही बुड्ढा परन्तु वह अपनी बीवी की सुंदरता का आनन्द लेने से अधिक पैसे कमाने में रूचि रखता है। निशा ने मुझे कॉल किया और बताया कि उसे एक अच्छे दोस्त की आवश्यकता है जिसके साथ वह अपने अनुभव बाँट सके। मैंने तुरंत हामी भर दी और निडरता से उसका उत्तर दिया। हम दोनों में कई दिनों तक फोन से बातें हुईं और एक दिन मैंने उससे उसके डील-डौल का वर्णन करने को पूछा। उसका अगला उत्तर मुझे पूरी तरह से उत्तेजना से भर गया।

उसके वर्णन से मेरा लंड फौरन पूरी तरह से खङा हो गया और मैं बहुत गरम हो गया। मैं उसकी सुंदरता का स्वाद लेना चाहता था अतः मैंने उससे मिलने की इच्छा जताई। शुरू में तो वह थोङा सकुचाई पर मैंने जब उसे समझाया कि हमारी मुलाकात हमेशा के लिए बिल्कुल गुप्त रहेगी तो वह मान गई। वह शर्मायी और डरी हुई थी क्योंकि शादी के बाद वह पहली बार किसी पराये आदमी से मिल रही थी। हमने एक सोमवार की सुबह मिलने का निर्णय लिया, क्योंकि अधिकतर लोग अपने-अपने काम पर चले जायेंगे और उसके पङोसियों को किसी अजनबी के उसके घर में आने का पता भी नहीं चलेगा। मैं समय से पहले ही वहाँ पहुँच गया और उसने मुस्कुरा कर मेरा स्वागत किया। क्या बताऊँ, वह भङकीली, गजब की प्यारी, निमंत्रण देती हुई, कुल मिला कर काफी सेक्सी थी! मैं अंदर गया और उसने मेरे पीछे दरवाज़ा बंद कर लिया। उसने मुझे सोफे पर बैठने को कहा, पर मैं उससे आँखें न हटा सका। वह हँसी और पूछा कि क्या बात है। मैं प्रशंसा के जितने शब्द जानता था, सबों का प्रयोग करके उसकी प्रशंसा की और वह शर्मा गयी। हे भगवान, अगर उसका पति ऐसी सुंदरता को नज़रअंदाज कर सकता था तो मुझे उसके मर्द होने पर भी शक होता है। हमने कुछ मिनट बातें की और चाय पी। पर मुझसे अधिक देर तक नियंत्रण नहीं हो पा रहा था। पर मैं जल्दी के चक्कर में ऐसे ख़ूबसूरत साथ का मौका खोना नहीं चाहता था। तभी फोन की घंटी बजी, और उसका पति जो बाहर दौरे पर गया हुआ था, फोन पर था, उसने बताया कि तीन दिन बाद की बजाय वह कल ही आ रहा था। यह जानकर वह उदास हो गयी व सर झुका कर शांत बैठ गयी। उसने मुझे ई-मेल में अपने पति के बारे में बताया थि कि वह बिना किसी कारण के उससे झगङता था। मैं धीमे से उसके पास बैठ गया और उसे सांत्वना देने के लिए अपना हाथ उसके कंधे पर रखा। यह शुरूआत थी। उसने अपना सिर मेरे कंधे पर रखा और सारा दृश्य रोमांटिक था, धीमा संगीत, हल्की सुगंध, और सबसे बढ़कर मेरे समीप बैठी यह प्यारी सी स्त्री। मैंने उसके गालों को छुआ और धीरे से अपने हाथ नीचे उसके गर्दन की ओर बढ़ाये। वह मुझसे ज्यादा जल्दबाज़ थी, उसने मेरा चेहरा उसकी तरफ किया और अपने होंठ मेरे होठों पर रख दिये। हम लगभग 10 मिनटों तक एक दूसरे को किस्स करते रहे और होठों को चूमते रहे और उसने अपना हेयर बैंड निकाल दिया। उसकी छाती तक की लंबाई वाले बाल झरने की तरह बिखर गये। वह और भी गोरी लगने लगी।

मैंने उसके कपङे खोलने शुरू किये, वो शरमाई, मुस्कुराई और अपनी आँखें बंद कर लीं। मैंने उसकी ब्रा खींची और सबसे अद्भुत चूचियों के दर्शन किये जो मैंने अबतक नहीं देखे थे। उसके निप्पल…

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