बन्ता अपने ऊँट पर सवार होकर एक मरूभूमि से गुज़र रहा था। वह बहुत लम्बी दूरी तय करके आ रहा था और उसे सहवास करने की इच्छा हो रही थी। जाहिर है कि वहाँ कोई औरत नहीं थी, अतः वह अपने ऊँट को ही उसने अपना निशाना बनाया।

उसने स्वयं को ऊँट के साथ सहवास की स्थिति में लाया ही था कि ऊँट भाग गया। वह उसके पीछे दौङा और पकङ लाया, और फिर से सवारी करने लगा। जल्द ही उसे फिर से सहवास की इच्छा हुई, अतः फिर से ऊँट के साथ सहवास करना चाहा। ऊँट ने फिर से भागकर अपनी अनिच्छा जतायी। तो फिर से उसने ऊँट को पकङा और फिर से चल पङा।

अंततः वह पूरी मरूभूमि को पार करने के बाद एक सङक पर आ गया। वहाँ एक टूटी कार पङी थी जिसमें तीन बङी-बङी चूचियों वाली अति-सुन्दर, व गोरी औरतें बैठीं थीं।

वह उनके पास गया और पूछा कि क्या उन्हें किसी प्रकार की सहायता की आवश्यकता है।
उनमें से सबसे अधिक ख़ूबसूरत कन्या ने कहा, “यदि आप हमारी कार ठीक कर देते हैं तो हम आपके लिए जैसा आप कहेंगे, हम करेंगी।”
सौभाग्य से बंता कार के बारे में थोङी-बहुत जानकारी रखता था और उसने कार को पलक झपकते ही ठीक कर दिया।
जब उसने अपना काम कर दिया, तो तीनों कन्याओं ने उससे पूछा, “हम किस तरह से आपका यह अहसान चुका सकेंगे…”
बंता ने थोङी देर सोचने के बाद उत्तर दिया, “क्या आप मेरे ऊँट को पकङे रह सकतीं हैं?”