मैं सायमा पाक़िस्तान के एक गाँव से हूँ (मैं अपना नाम नहीं बता सकती). मैं जब बी.ए. में थी, मेरी शादी एक अमेरिका में रह रहे मर्द़ से हो गई। यह निक़ाह फोन पर हुआ था। मैं उस समय 21 साल की थी और अच्छी दिखती थी। मेरे परिवार वाले खुश थे कि मुझे अमेरिका जाने का अच्छा मौक़ा मिला। आगे की कहानी उर्दू में है.

शादी के एक साल बाद मैं अमेरिका चली गयी। जब मैं न्यूयॉर्क एअरपोर्ट पहुँची तो मैं यह देखकर हैरान रह गयी की मेरा मर्द़ मुझ से कोई 30 साल बङा था। लेकिन अब क्या हो सकता था। मेरे पति के साथ उनका एक दोस्त भी आया हुआ था जिस की उम्र तक़रीबन 29 या 30 साल होगी। घर जाते हुए मुझे पता चला की मेरे पति एक गैस स्टेशन पर रात को काम करते हैं और वो दोस्त एक बैंक में काम करता है। मेरे पति को कार कार चलानी नहीं आती थी इसलिए वो उस दोस्त को साथ लेकर आये थे। दिल में गुस्सा तो बहुत आया लेकिन ये सोच कर ख़ामोश रही कि घर वालों को परेशान नहीं करना। रास्ते में ही से फोन करके घर वालों को बता दिया था कि पहुँच गयी हूँ। कम लफ़्जों में, हमलोग कोई 2 घंटे में घर पहुँच गये। वो एक बिल्डिंग थी, जिस में वो दोस्त भी रहता था और हम भी और बहुत लोग। लेकिन पाक़िस्तानी सिर्फ हम ही थे।

दिन गुज़रने लगे। मेरे दिल में क्या क्या अरमान ते लेकिन सब दिल में ही रह गये। लेकिन मैंने किसी से कोई शिक़वा ना किया। मेरे पति ने 2 महीने में सिर्फ़ 5 बार मेरे साथ सेक्स किया। इन 2 महीनों में पति का वो दोस्त (आमिर) मेरे क़रीब होता गया। शनिवार और इतवार को वो खाली होता था और मैं उस के साथ शॉपिंग पर जा सकती थी, पति की मर्ज़ी से। आहिस्ता-आहिस्ता वो मेरे साथ फ्री होता गया। मेरा पति शाम को 6 बजे नौकरी पर चला जाता थे और सुबह के 7 बजे आता थे। वो अकेले ही गैस स्टेशन पर काम करते थे। एक रात 10 बजे मेरे पति का कॉल आया कि मैं आमिर के साथ गैस स्टेशन पर आ जाऊँ ताकि कुछ वक्त के लिए आराम मसहूस करूँ और बर्फ देख लूँ। मैं आमिर के साथ कार में पिछली सीट पर बैठ कर चली गयी।

कुछ देर हम लोग वहाँ रहे, ब़र्फबारी बहुत हो रही थी, हमें वापिस आना था, इसलिए मैं और आमिर फिर कार में बैठ गये और कुछ दूर जाने के बाद आमिर ने मुझे आगे वाली सीट पर आने को कहा तो मैं आगे आ गयी। बर्फ बहुत गिर रही थी। कार धीमी चल रही थी। रात के बारह बजे का समय था। कार की पार्किंग हमें घर से कोई 2 ब्लॉक दूर मिली। कार पार्किंग करने के बाद हम वॉक करने लगे, मैं आगे थी और वो पीछे था, बर्फ की वज़ह से एक बार मैं गिरने लगी तो आमिर ने मुझे थाम लिया और फिर उसने मेरा हाथ पकङ लिया ताकि मैं गिर ना जाऊँ। उसके हाथ पकङने की वज़ह से मैं रिलैक्स महसूस करने लगी और मज़ा भी आने लगा क्योंकि वो मेरा हाथ दबा भी रहा था और मैं उस का मक़सद भी समझ रही थी, कोई बच्ची तो नहीं थी। बिल्डिंग में आने के बाद भी उसने मेरा हाथ नहीं छोङा और ना ही मैंने छुङाने की कोशिश की। लिफ्ट में आने के बाद उसने मेरा दूसरा हाथ भी पकङ लिया, मैंने कहा, “ये आप क्या कर रहे हैं, कोई देख लेगा?”
तो आमिर ने जवाब दिया “यहाँ कोई किसी को नहीं देखता कि कोई क्या कर रहा है।”
“मेरे पति को तो पता चल सकता है?” मैंने पूछा।
आमिर ने कहा “वो अकेला काम करता है और वो सुबह 7 बजे से पहले आ नहीं सकता, वैसे भी उस ने ख़ुद ही तो तुम्हें इस वक़्त रात को मेरे साथ भेजा है।”
ये बातें करते हुए हमलोग मेरे अपार्टमेंट में आ गये। रूम में आते ही उसने मुझे अपनी मज़बूत बाँहों में ले लिया और किस्सिंग शुरू कर दी, पहले तो मैं कुछ विरोध करती रही लेकिन फिर उसके आगे हथियार डाल दिये और रिस्पाँस देने लगी…

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